Monday, June 23, 2008

रोशनी की जरूरत है क्या

देखिये न ये उनकी शरारत है क्या
पूछते हैं वो मुझसे मुहब्बत है क्या

आ गया तुमको चलना अंधेरे में पर
मत कहो रोशनी की जरूरत है क्या

हमको सारे वफ़ा करने वाले मिले
इतनी उम्दा हमारी भी किस्मत है क्या

सर झुकाता है जिसको ये सारा जहाँ
उस खुदा से भली कोई सूरत है क्या

दे चुका हूँ मैं सब तुमको अपना सुनो
दुनिया वालो तुम्हें अब शिकायत है क्या

तुमने सच को हमेशा कहा चीखकर
तुमको ख़ुद से ही 'अद्भुत' अदावत है क्या

2 comments:

Advocate Rashmi saurana said...

दे चुका हूँ मैं सब तुमको अपना सुनो
दुनिया वालो तुम्हें अब शिकायत है क्या
bhut khub.sundar rachana.badhai ho. aap apna word verification hata le taki humko tipani dene mei aasani ho.

Udan Tashtari said...

हिन्दी चिट्ठाजगत में आपका स्वागत है. नियमित लेखन के लिए मेरी हार्दिक शुभकामनाऐं.

वर्ड वेरिपिकेशन हटा लें तो टिप्पणी करने में सुविधा होगी. यह बस एक निवेदन मात्र है.