ख्वाब देखो किस कदर थे तेरे मेरे मिल रहे
रौशनी बोई मगर क्यों हैं अंधेरे मिल रहे
चल पड़े थे चांदनी ले कर के झोली में सभी
राह में किस तर्ह हैं सब को लुटेरे मिल रहे
बाँट ली थी ठोकरें और रास्ते की धूप तक
अब मगर तनहाइयों में हैं बसेरे मिल रहे
रात भर ये सोचते थे सुब्ह आएगी ज़रूर
कालिमा की कैद में हैं अब सवेरे मिल रहे
देवता ने दे दिए वरदान बिन मांगे सभी
आज लेकिन देवता को दुःख घनेरे मिल रहे
देख कर तपती ज़मीं रह रह के आता है ख़याल
आसमाँ की गोद में बादल घनेरे मिल रहे
इक सुरीली तान के वश में हुए हैं क्यों सभी
बीन सी कोई बजाते हैं सपेरे मिल रहे
एक शीशे में सभी ने अक्स देखा खुश हुए
कांच के टुकड़े ज़मीं पर अब बिखेरे मिल रहे
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