Monday, June 23, 2008

आदम की ज़िन्दगी की रफ़्तार देखिये

आदम की ज़िन्दगी की रफ़्तार देखिये
इन्सानियत पे हावी कारोबार देखिये

रिश्तों की कब्र खोदे बैठे हैं लोग सारे
फिर किस तरह टिकेंगे परिवार देखिये

सियासत के अंधेरों में डूबी है कौम सारी
सूरज को रोशनी का तलबग़ार देखिये

भेड़ों पे करने शाषन आये हैं भेड़िये भी
वोटों की पेटियों का चमत्कार देखिये

हँस उठेगी ज़िंदगी यूँ खुद-ब-खुद ’अजय’
औरों के ग़म में रोकर एक बार देखिये

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